देशभर के जवान एक एक कर शहीद हो रहे हैं। उत्तराखंड में ही पिछले कुछ दिनों में कई जवान अपनी शहादत दे चुके हैं। राखी से ठीक पहले कैप्टन दीपक सिंह के बलिदान ने उनकी बहनों से मानों भाई की रक्षा का वचन तक छीन लिया हो। स्वतंत्रता दिवस के दिन शहीद का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो हर किसी की आंखे नम हो गई। दरअसल डोडा जिले के अस्सर में बुधवार को हुई भीषण मुठभेड़ में सेना की 48 राष्ट्रीय राइफल के कैप्टन दीपक सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए। उनका पार्थिव शरीर गुरुवार को देहरादून पहुंचा। जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुठभेड़ में ग्राम रक्षा समूह (वीडीजी) का एक सदस्य भी घायल हुआ है। एक तरफ ये देश आजादी के जश्न में डूबा था, वही उत्तराखण्ड इस दिन दुख से भर गया है। देहरादून निवासी कैप्टन दीपक सिंह ने देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की बलि दे दी । कैप्टन दीपक को देहरादून लाया गया और उन्हें अंतिम विदाई दी गई । कैप्टन दीपक का शव उनके घर लाया गया तो काफी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे । कैप्टन दीपक दो बहनों के इकलौते भाई थे । शहीद दीपक सिंह के घर पहुंचने पर सभी ने नम आँखों से हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए उन्हे अंतिम विदाई दी । इससे पहले जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर राज्यपाल ले जनरल गुरमीत सिंह व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बलिदानी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। शहीद के परिजन ताबूत से लिपटकर बिलख पड़े। स्वजन को विलाप करते देख वहां मौजूद हर किसी की आंख नम हो गई। इस दौरान लोगों में गम और गुस्सा दोनों दिखा। लोगों ने भारत माता की जयघोष की, तो वहीं पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पुलिस–प्रशासन के अधिकारियों सहित कई लोगों ने बलिदानी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद बलिदानी का पार्थिव शरीर हरिद्वार ले जाया गया। जहां सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। वहीं खबर है कि इस दौरान सुरक्षाबलों ने एक पाकिस्तानी आतंकी को मार गिराया। जंगल में आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना के बाद सेना और पुलिस ने मंगलवार देर शाम आपरेशन शुरू किया था। रातभर घेराबंदी के बाद बुधवार तड़के आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच एक बार फिर मुठभेड़ शुरू हो गई थी। मुठभेड़ के दौरान सेना के कैप्टन दीपक सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए सैन्य अस्पताल ले जाया गया था, जहां वह वीरगति को प्राप्त हुए। इससे पहले भी 9 जुलाई को उत्तराखंड के पांच जवान शहीद हो गए थे। नौ जुलाई को जब जब लोग सोकर उठे तो सुबह सबसे पहले बुरी खबर जम्मू कश्मीर से आई थी। कि 8 जुलाई की शाम को जम्मू कश्मीर के कठुआ में सेना पर हुए आतंकी हमले में जवान शहीद हुए हैं। जिसमें शहीद सभी उत्तराखंड के लाल थे. धीरे-धीरे जानकारी मिली तो पता चला कि 22 गढ़वाल रेजीमेंट के 5 जवान शहीद हुए और 5 घायल हुए हैं. शहीद जवान टिहरी, पौड़ी और रुद्रप्रयाग के रहने वाले थे. जिनका पार्थिव शरीर दोपहर बाद सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा जौलीग्रांट पहुंचा था। 10 जुलाई को पांचों शहीदों का सैन्य सम्मान के साथ ऋषिकेश और उनके गृह क्षेत्र में अंतिम संस्कार किया गया था। हमले में नायब सूबेदार आनंद सिंह, हवलदार कमल सिंह, नायक विनोद सिंह, राइफलमैन अनुज नेगी और राइफलमैन आदर्श सिंह नेगी शहीद हुए थे और अब फिर से रक्षाबंधन से ठीक पहले इकलौते भाई का चले जाना, परिजनों के लिए बहुत बड़ा सदमा है। आखिर इस देश में अमन में अमन चैन कायम होगा, कब कुंठित और अशिक्षित लोग इस आतंकवादी मानसिकता से बाहर निकलेंगे और कब हमारी सरकार अपने ठोस प्रयासों से कोई ऐसी रणनीति बनाएगी कि हमारे किसी भी जवान की ओर गोली चलाने वाला ऐसा सोच कर भी डरे। किसी मां को ये पीड़ा न झेलनी पड़े और किसी बहन को अपने भाई की सूनी कलाई के साथ उसको अलविदा ना कहना पड़े। क्या कुछ है आपकी राय, हमको कॉमेंट करके जरूर बताइएगा। जल्द मिलते है अगली वीडियो में तब तक जय हिंद , जय भारत।।

