उत्तराखंड राज्य में पांचों लोक सभा सीट पर BJP की लगातार जीत। क्या विधानसभा सीट पर भी रहेगा भाजपा का बोलबाला। क्या है बद्रीनाथ के विधानसभा उपचुनाव पर लोगों के विचार। आखिर क्यों बद्रीनाथ के विधानसभा उपचुनाव में है सियासी माहौल गरम। मूल निवासियों की क्या है मांगे और आखिर और क्यों उनके लिए सुविधाओं में है भेदभाव। नमस्कार दगड़ियों में नलिनी गोसाईं उत्तराखंड की नौनी एकबार फिर से स्वागत करती हु अपने इस खास कार्यक्रम चुनावी छिबड़ाट में, और आज हम बात करने वाले है बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव की। बद्रीनाथ और मंगलौर उपचुनाव को लेकर सियासी पारा अब चढ़ने लगा है। उपचुनाव के लिए 10 जुलाई मतदान जबकि 13 जुलाई को मतगणना की तिथि तय की गई है। इससे पहले निर्वाचन आयोग ने 26 जून को नाम वापिसी की अंतिम तिथि भी तय की थी। बद्रीनाथ में भाजपा के राजेंद्र भंडारी, कांग्रेस के लखपत सिंह बुटोला समेत पांच प्रत्याशी मैदान में है, वहीं मंगलौर में कांग्रेस के काजी निजामुद्दीन, भाजपा के करतार सिंह भड़ाना, बसपा के उबैदुर रहमान समेत सात दावेदार मैदान में है। यहां भी मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होता दिखाई दे रहा है। गढ़वाल लोकसभा की 14 विधानसभा सीटों में बदरीनाथ ही इकलौती सीट थी, जहां कांग्रेस का वर्चस्व था। लेकिन पार्टी के विधायक रहे राजेंद्र भंडारी के लोक सभा चुनाव से ठीक पहले पाला बदल लेने के बाद कांग्रेस के हाथ खाली हो गए। बदरीनाथ विधानसभा सीट पर भाजपा के अब तक के प्रदर्शन का सवाल है तो 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे कांग्रेस के टिकट पर राजेंद्र भंडारी के हाथों शिकस्त मिली थी। अब राजेंद्र भंडारी भाजपा के उम्मीदवार हैं। लोकसभा चुनाव से पहले भंडारी भाजपा में शामिल हुए थे। उनके आने से बदरीनाथ सीट पर भाजपा को बढ़त तो मिली लेकिन उतने वोट नहीं मिले जितने 2019 के लोस चुनाव में उसने हासिल किए थे। 2019 में भाजपा को 37069 वोट मिले थे। और 2024 के चुनाव में वह 31854 वोट ही ले पाई। कांग्रेस 23600 वोटों पर सिमट गई थी। इस सीट पर कांग्रेस उन मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है, जो राजेंद्र भंडारी के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने से नाराज हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि ये नाराज वोटर कांग्रेस में ही नहीं भाजपा में भी हैं, जो भंडारी के आने से व्यथित हैं। इसी रणनीति पर कांग्रेस फोकस कर रही है और भाजपा को इसका तोड़ तलाशना पड़ रहा है। मतदान तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, मतदाताओं की खामोशी टूटने का नाम नहीं ले रही है। वोटरों की चुप्पी ने प्रत्याशियों की पेशानी पर बल डाल रखे हैं। अगर देखा जाए तो बद्रीनाथ के मूल्य लोगों का यह कहना है कि नेता वोट मांगने के लिए हमेशा आ जाते हैं लेकिन अभी तक आसपास के इलाकों में कोई भी सुविधा प्राप्त नहीं हुई है। उनका कहना है कि उन्हें अपने संसाधनो को इस्तेमाल करने के लिए मांग करनी पड़ती है। साथ ही लोगों का यह भी कहना है कि दूसरे राज्यों से आए हुए लोगों के लिए सारी सुविधाएं प्राप्त की जाती है किंतु उत्तराखंड के मूल्य लोगों के लिए कोई भी सुविधा नहीं की गई है। इसी के चलते लोगों के बीच काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों की आवश्यकताओं की दृष्टि से, यह चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। लोग नौकरियों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, और आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। इस चुनाव से उन्हें एक सरकार की आवश्यकता है जो उनके मुद्दों पर ध्यान देकर उनकी जरूरतों को पूरा कर सके। इसलिए, इस चुनाव के परिणाम से लोग उम्मीद कर रहे हैं कि एक सकारात्मक परिवर्तन आएगा जो उनकी जीवनस्तर में सुधार लाएगा। आपको भी लोगों की आवश्यकताओं के संदर्भ में इस चुनाव के परिणाम के बारे में क्या विचार हैं? ये हमे कॉमेंट सेक्शन में जरूर बताएं और अगर आपको हमारी ये वीडियो पसंद आई है तो वीडियो को लाइक करना ना भूलें साथ ही अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नही किया है तो वो भी कर लें ताकि हम आपतक ऐसी और भी विडियोज पहुंचा सके। धन्यवाद।

