जब होश संभाला तो पिता के हाथ में डंडा ही पाया, जो कभी भी हमारे सिर, पैर और शरीर पर टूट पड़ता था। पिता का दुलार और प्यार क्या होता है, कभी देखा ही नहीं। ये कहना है उन दो भाइयों का जिन्होंने अपने ही पिता का कत्ल कर आनन फानन में उनका अंतिम संस्कार तक कर दिया।

