दून मेडिकल कॉलेज ने इतिहास रचते हुए मात्र ढाई दिन की दिवंगत बच्ची का देहदान स्वीकार किया। बच्ची का शव उसके पिता राममेहर की मौजूदगी में कॉलेज के एनाटॉमी विभाग को सौंपा गया। यही नहीं कहा जा रहा है कि देश में यह पहली बार हुआ है जब इतनी कम उम्र में किसी बच्चे का देहदान किया गया है। नमस्कार दगड़ियों मैं नलिनी गोसाईं उत्तराखंड की नौनी, स्वागत करती हूं आप सभी का अपने खास कार्यक्रम में यूं थे भी सुना में।एनाटॉमी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एमके पंत ने इस बारे में बताया कि बच्ची का शव कॉलेज संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा। इसे लंबे समय तक संरक्षित रखने के लिए विशेष थर्मालीन तरल का लेप लगाया जाएगा। हरिद्वार जिले के पुरुषोत्तम नगर निवासी राम मेहर और उनकी पत्नी मगन देवी ने यह कदम उठाकर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।

